Results for साबर मंत्र

सर्व कार्य सिद्धि साबर मन्त्र प्रयोग

October 17, 2013
बंगाली भाषा में ये मंत्र स्वयं सिद्ध है अतः इसे अलग से सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं. किसी भी कार्य को शुरू करने से पहले सिर्फ 3 बार इस मन्त्र का उच्चारण कर अपने दायें हाँथ में फूंक मार लें फिर जिस कार्य को आप करना चाहतें है उसे करे निश्चय ही सफलता मिलेगी .इस मंत्र का प्रयोग सुबह उठकर बिस्तर पर ही जप कर करें एवं दायें हाँथ में फूंक मारें तो दिन अच्छा गुजरेगा एवं कार्यमें सफलता भी प्राप्त होगी .लेकिन किसी भी गलत कार्य को करते समय इस मन्त्र का उपयोग कदापि न करें अन्यथा परिणाम विपरीत भी हो सकतेहैं .अतः जब भी उपयोग में लायें अच्छे कार्यों के लिए ही  ..

मंत्र - “काली घाटे काली माँ, पतित-पावनी काली माँ, जवा फूले-स्थुरी जले. सई जवा फूल में सीआ बेड़ाए. देवीर अनुर्बले. एहि होत करिवजा होइबे. ताही काली धर्मेर. बले काहार आज्ञे राठे. कालिका चण्डीर आसे।”
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नवनाथ स्तुति मंत्र प्रयोग

October 08, 2013
मेरा अक्सर यही प्रयास रहता है कि आप को मै शीघ्र सिद्धि प्रदायक एवं असरदार मन्त्रों की शक्ति से परिचय कराऊँ ,और जितने भी मन्त्र की जानकारी मै आपको देता हूँ वो सभी अपने आप में एक विशेष प्रभाव रखतें हैं । आपको कोई भी मंत्र देने से पहले  मै उस मंत्रशक्ति के प्रभाव को देखकर ही आपको मंत्र का प्रयोग करने की सलाह देता हूँ जिनमे विशेष किसी प्रकार के अनुष्ठान आदि की जरूरत नहीं होती ।
मेरा आज का मन्त्र शाबर मन्त्रों की श्रेणी में  अपना विशेष प्रभाव रखता है । अगर आप किसी प्रेत बाधा से ग्रसित हैं या आप के परिवार पर किसी ने भीषण मंत्र प्रयोग कर दिया हो जिसकी वजह से आपके  घर के व्यक्तियों में मनमुटाव होना या किसी बीमारी से जूझना या अन्य किसी भी कारणवश आप को आर्थिक नुकसान की स्थितियों से गुजरना पड़ रहा है तो उपरोक्त समस्त दोषों को दूर कर अभीष्ट सिद्धि प्रदान करने में ये मंत्र विशेष प्रभावी  है।


विधि -:  आसन, व वस्त्र  का चुनाव आप अपनी मर्जी के अनुसार कर सकते है ,माला रुद्राक्ष की रहेगी ,नवनाथ की तस्वीर के सामने साधना काल में अगरबत्ती एवं घी का दिया  जलता रहना चाहिए । इस अनुष्ठान में माथे पर भस्म लगाने का भी विधान है जिसे आप अगरबत्ती की राख से भी पूरा कर सकतें है ।
जप संख्या अगर 108  रोजाना 21 दिनों तक की जाए तो अति उत्तम रहेगा अगर समय के अभाव के चलते 1 माला नहीं कर सकते तो 21 की संख्या में 21 दिन जप करने से भी नवनाथों की सिद्धि की कृपा प्राप्त की जा सकती है । इस मन्त्र के जप से सब प्रकार की  भय-पीड़ा, रोग-दोष, भूत-प्रेत-बाधा दूर होकर मनोकामना, सुख-सम्पत्ति आदि अभीष्ट कार्य सिद्ध होते हैं।

मन्त्र - :

आदि-नाथ कैलाश-निवासी, उदय-नाथ काटै जम-फाँसी। सत्य-नाथ सारनी सन्त भाखै, सन्तोष-नाथ सदा सन्तन की राखै। कन्थडी-नाथ सदा सुख-दाई, अञ्चति अचम्भे-नाथ सहाई। ज्ञान-पारखी सिद्ध चौरङ्गी, मत्स्येन्द्र-नाथ दादा बहुरङ्गी। गोरख-नाथ सकल घट-व्यापी, काटै कलि-मल, तारै भव-पीरा। नव-नाथों के नाम सुमिरिए, तनिक भस्मी ले मस्तक धरिए। रोग-शोक-दारिद नशावै, निर्मल देह परम सुख पावै। भूत-प्रेत-भय-भञ्जना, नव-नाथों का नाम। सेवक सुमरे चन्द्र-नाथ, पूर्ण होंय सब काम।।

विशेष -:मन्त्र जप के समय आपको जो भी अनुभूतियाँ हों उन्हें आप किसी से भी साझा न करें ।



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साबर मंत्र सिद्ध करने की विधि

July 08, 2013
आज बहुत दिनों के बाद ब्लॉग में फिर से वापसी हुई है तो सोंचा कि कुछ ऐसी जानकारी दी जाये जो अक्सर लोग मुझसे फोन के माध्यम से पूंछते रहतें हैं  कि बिना गुरु किये मंत्रो को जाग्रत या सिद्ध कैसे करें?
आज लगभग हर नव साधक के मन में ये विचार आता है की वो मन्त्रों को जागृत  या फिर सिद्ध करें किन्तु आधी -अधूरी जानकारी की वजह से बहुत से लोग मंत्रो को सिद्ध नहीं कर पाते और दोष देतें हैं की अमुक मन्त्र से काम नहीं हुआ या फिर मेहनत बेकार चली गयी .आज की पोस्ट उन्ही लोगों के लिए है जो मंत्रो को सिद्ध करना चाहते हैं.ये सही है कि बिना गुरु के सफलता नहीं प्राप्त की जा सकती ,किन्तु अगर कोई ढंग का गुरु न मिले तो क्या सफलता की कामना ही नहीं करनी चाहिए ?


अब से आप कोई भी साधना चालू करें तो सबसे पहले अपने पूज्य देव की फोटो या मूर्ति के सामने साधना से सम्बंधित मंत्र का ११ बार जप करें इसका मतलब ये होता है की आप अपने आराध्य से मन्त्र की दीक्षा ले रहें हैं इस प्रक्रिया के बाद  आराध्य को अपना गुरु मानकर नीचे दिए  सर्वार्थ साधक मंत्र  का २१ बार जप कर लें .
सर्वार्थ साधक मंत्र इस प्रकार है -“गुरु सठ गुरु सठ गुरु हैं वीर, गुरु साहब सुमरौं बड़ी भाँत । सिंगी टोरों बन कहौं, मन नाऊँ करतार । सकल गुरु की हर भजे, घट्टा पकर उठ जाग, चेत सम्भार श्री परम-हंस ।”
इसके बाद गणेश जी का ध्यान करते हुए निम्न मंत्र की एक माला जप करें .
“वक्र-तुण्डाय हुं ” 
इसके बाद चारों  दिशाओं से रक्षा की कामना करते हुए नीचे लिखे मंत्र का एक माला जप करें ,क्योंकि किसी भी साधना को शुरू करने से पहले आपको अपनी सुरक्षा का उपाय भी करना होगा  जिससे की आपकी उपासना में किसी भी तरह की नकारात्मक शक्तियों का व्यवधान न होने पाये
दिग्बन्धन मंत्र -“वज्र-क्रोधाय महा-दन्ताय दश-दिशो बन्ध बन्ध, हूं फट् स्वाहा ”

ये सभी मंत्र स्वयं सिद्ध हैं इसलिए इन्हें सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं है .
उपरोक्त मंत्रो का जप करने के बाद आप अपनी साधना या मंत्र जप आरम्भ कर सकतें है ,साधना से सम्बंधित 
किसी अन्य जानकारी के लिए आप कमेन्ट बाक्स में अपनी जिज्ञासा मुझे भेज सकतें है ............. 

साबर मंत्र सिद्ध करने की विधि साबर मंत्र सिद्ध करने की विधि Reviewed by Unknown on July 08, 2013 Rating: 5

सम्पन्नता दायक गोरख साबर मन्त्र

July 23, 2012

गोरख शाबर  - गोरख जी का ये साबर मंत्र समस्त प्रकार की सुख सम्पन्नता एवं आत्मिक शांति को प्रदान करने वाला है ,इस मंत्र का नियमित जप करने से जप कर्ता को एक विशेष प्रकार की शांति का अनुभव तो होता ही है साथ ही साथ आर्थिक, पारिवारिक आदि बाधाएं भी कुछ दिनों में स्वतः ही समाप्त हो जाती है ,अत्यंत अनुभूत एवं लाभदायक मंत्र है ,नीचे लिखे मंत्र का रोजाना २१,२७,५१,अथवा सामर्थ्य अनुसार विषम संख्या में जप करने से उपरोक्त लाभ कुछ दिन में ही मिलने शुरू हो जाते हैं 

 मंत्र इस प्रकार है -ॐ गुरुजी, सत नमः आदेश, गुरुजी को आदेश, ॐकारे शिव-रुपी, मध्याह्ने हंस-रुपी, सन्ध्यायां साधु-रुपी। हंस, परमहंस दो अक्षर। गुरु तो गोरक्ष, काया तो गायत्री। ॐ ब्रह्म, सोऽहं शक्ति, शून्य माता, अवगत पिता, विहंगम जात, अभय पन्थ, सूक्ष्म-वेद, असंख्य शाखा, अनन्त प्रवर, निरञ्जन गोत्र, त्रिकुटी क्षेत्र, जुगति जोग, जल-स्वरुप रुद्र-वर्ण। सर्व-देव ध्यायते। आए श्री शम्भु-जति गुरु गोरखनाथ। ॐ सोऽहं तत्पुरुषाय विद्महे शिव गोरक्षाय धीमहि तन्नो गोरक्षः प्रचोदयात्। ॐ इतना गोरख-गायत्री-जाप सम्पूर्ण भया। गंगा गोदावरी त्र्यम्बक-क्षेत्र कोलाञ्चल अनुपान शिला पर सिद्धासन बैठ। नव-नाथ, चौरासी सिद्ध, अनन्त-कोटि-सिद्ध-मध्ये श्री शम्भु-जति गुरु गोरखनाथजी कथ पढ़, जप के सुनाया। सिद्धो गुरुवरो, आदेश-आदेश।।


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हनुमान जी का सर्व भय हरण साबर मंत्र

July 23, 2012



आज प्रत्येक मनुष्य चाहे वो अमीर हो या गरीब ,किसी न किसी समस्या व् परेशानी से जरूर ग्रसित है .प्राचीन काल से ही दैनिक व आर्थिक जीवन की परेशानियो के लिए ईश्वर की आराधना व विभिन्न प्रकार की क्रिया व
कर्मकांड किये जाते रहे हैं ,जिनमें शाबर मंत्रो का विशेष प्रभाव रहा है मैंने खुद भी अपने जीवन काल में कई व्यक्तियों को इन शाबर मंत्रो से कई तरह की परेशानियों से छुटकारा दिलवाया है ,इन मंत्रो के जाप में कोई विशेष अनुष्ठान की आवश्यकता नहीं होती क्योंकि ये मंत्र अपने आप में ही स्वयं सिद्ध होतें हैं.
यदि रोजाना कुछ समय के लिए एक निश्चित संख्या में इन मन्त्रों का जप किया जाये तो इसके परिणाम खुद ही सामने आने लगते हैं .जनकल्याणार्थ हेतु कुछ शाबर मन्त्र लिख रहा हूँ जिनका लाभ आप भी उठायें एवं दूसरों को भी इन मंत्रो से लाभान्वित करें

हनुमान जी का सर्व भयहरण एवं रक्षा दायक शाबर मंत्र - संकट के समय नीचे लिखे मंत्र का जप करने से सभी प्रकार की दुष्ट शक्तियों एवं किसी भी प्रकार के भय का नाश होता है ,किसी भी शुभ मुहूर्त में हनुमान जी चित्र के सामनें लाल लंगोट , ५ फल ,५ लौंग ,५ इलाइची एवं १ सुपारी अर्पित करके लाल फूल एवं गुग्गुल की आहुति दे कर १००० की संख्या में जप करना चाहिए -

मंत्र इस प्रकार है -

“ॐ गर्जन्तां घोरन्तां, इतनी छिन कहाँ लगाई ? साँझ क वेला, लौंग-सुपारी-पान-फूल-इलायची-धूप-दीप-रोट॒लँगोट-फल-फलाहार मो पै माँगै, अञ्जनी-पुत्र ‌प्रताप-रक्षा-कारण वेगि चलो. लोहे की गदा कील, चं चं गटका चक कील, बावन भैरो कील, मरी कील, मसान कील, प्रेत-ब्रह्म-राक्षस कील, दानव कील, नाग कील, साढ़ बारह ताप कील, तिजारी कील, छल कील, छिद कील, डाकनी कील, साकनी कील, दुष्ट कील, मुष्ट कील, तन कील, काल-भैरो कील, मन्त्र कील, कामरु देश के दोनों दरवाजा कील, बावन वीर कील, चौंसठ जोगिनी कील, मारते क हाथ कील, देखते क नयन कील, बोलते क जिह्वा कील, स्वर्ग कील, पाताल कील, पृथ्वी कील, तारा कील, कील बे कील, नहीं तो अञ्जनी माई की दोहाई फिरती रहे. जो करै वज्र की घात, उलटे वज्र उसी पै परै, छात फार के मरै. ॐ खं-खं-खं जं-जं-जं वं-वं-वं रं-रं-रं लं-लं-लं टं-टं-टं मं-मं-मं, महा रुद्राय नमः, अञ्जनी-पुत्राय नमः, हनुमताय नमः, वायु-पुत्राय नमः, राम-दूताय नमः,”

हनुमान जी का सर्व भय हरण साबर मंत्र हनुमान जी का सर्व भय हरण साबर मंत्र Reviewed by Unknown on July 23, 2012 Rating: 5
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