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ह्रदय रेखा

August 04, 2012

  

ह्रदय रेखा हाँथ में उपस्थित सबसे पहली रेखा है जो उंगलियों को (बुध से ले कर गुरु पर्वत ) घेरे रहती है .हस्त रेखा में इस रेखा का महत्वपूर्ण स्थान होता है ,इस रेखा के द्वारा हम व्यक्ति के प्रेम की भावनाओं एवं उसकी उदारता का पता लगातें है,ये रेखा हमें ये बताती है की व्यक्ति के ह्रदय की प्रकृति कैसी है .व्यक्ति कठोर ह्रदय का है अथवा सरल ,व्यक्ति में महत्वाकांक्षा है कि नहीं आदि बातों को हम ह्रदय रेखा के माध्यम से पता लगातें हैं .इस रेखा का आरम्भ स्थान विभिन्न उँगलियों के नीचे से हो सकता है .मैं यहाँ पर आपको ह्रदय रेखा के कुछ तथ्यों कि जानकारी देता हूँ


1. जब ह्रदय रेखा बृहस्पति उंगली के बिलकुल बाहर से आरम्भ होती है तो व्यक्ति प्रेम में अच्छा या बुरा कुछ भी सोंचने में असमर्थ हो जाता है, व्यक्ति को अपने प्रेमी या प्रेमिका में कोई दोष नजर नहीं आता और वह उसकी पूजा करता है, ऐसे जातक अधिकांशतः प्रेम में धोखा खातें है या फिर अंधविश्वास में धोखा खाते है .


2. यदि ह्रदय रेखा बृहस्पति पर्वत के बीच से आरम्भ हो तो जातक के प्रेम में अन्धविश्वासी नहीं होते , ये जातक प्रेम में अपनी भावनाओं को काबू में रखतें हैं इस प्रकार की रेखा सर्वोत्तम समझी जाती है, ऐसे व्यक्ति प्रेम में दृढ़ और विश्वसनीय होते है,उनका चारित्रिक आचरण उच्च कोटि का होता है, वे महत्वाकांक्षी होते है, सज्जन होते है और जीवन में सफलता प्राप्त करते है, वेअपने स्तर से नीचे बहुत कम विवाह करते है और वे विवाह के बाद कम प्रेम सम्बन्ध स्थापित करते है, उनका प्रेम स्थायी होता है, वे दूसरेविवाह या तलाक में विश्वास नहीं करते .

3. यदि ह्रदय रेखा पहली या दूसरी अंगुली के बीच के स्थान से आरम्भ हो अर्थात गुरु और शनि पर्वत के मध्य से आरम्भ तो व्यक्ति प्रेम के मामलो में शांतियुक्त एवं गंभीर स्वभाव का होता है, इनमे बृहस्पति पर्वत का दिया हुआ आदर्श और महत्वकांक्षा तथा शनि पर्वत का दिया हुआ स्वार्थी स्वभाव दोनों मिश्रण होता है, यद्यपि वे अपने प्रेम के लिए बड़ा से बड़ा बलिदान कर सकते हैं , किन्तु वे अपने प्रेम का प्रदर्शन नहीं करते, वे प्रेम तो ह्रदय से करते है, किन्तु इतना नहीं कि अपने प्रेमी या प्रेमिका के लिएअपना सब कुछ बर्बाद कर लें.

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4. यदि ह्रदय रेखा शनि पर्वत से आरम्भ हो तो जातक प्रेम के सम्बन्ध में स्वार्थी होते है, उनमें बलिदान करने का स्वभाव नहीं होता, वे चिडचिडे मिजाज के कम बोलने- चालने वाले होते है और अपने प्रेम का प्रदर्शन नहीं करते, वे हठी स्वभाव के होते है और जिस व्यक्ति को चाहते है उसे प्राप्त करके ही चैन लेते है , किन्तु एक बार जब वे उसको प्राप्त कर लेते है तो वे उसके प्रति उदासीन हो जाते है और पूर्ण निष्ठा नहीं निभाते है, उन्हें अपनी कमियां तो नहीं दिखाई देती, किन्तु उनके जीवन साथी, प्रेमी या प्रेमिका से कोई गलती हो जाये तो वे उसे क्षमा नहीं करते.

5. यदि ह्रदय रेखा बहुत लंबी अर्थात हथेली के एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुच जाये तो जातक अत्यंत ईर्ष्यालु स्वभाव का होता है, यह अवगुण अत्यधिक मात्रा में बढ़ जाता है, यदि मस्तिष्क रेखा बहुत झुकाव के साथ चंद्र की ओर मुड जाये, ऐसी स्थिति में ईर्ष्यालु स्वभाव प्रचुर मात्रा में आ जाती है और जातक निरर्थक कल्पनाओ के कारण अधिक ईर्ष्यालु बन जाता है .

6. यदि ह्रदय रेखा बृहस्पति क्षेत्र पर नीचे की ओर मुड जाये, तो जातक को अपने प्रेम और मैत्री संबंधो में अत्यंत निराशा का सामना करना पड़ता है, ऐसे व्यक्ति प्रेम के प्यासे होते है, उनमे यह समझाने की क्षमता नहीं होती कि उन्हें वास्तविक प्रेम कहाँ मिलेगा, ऐसा भी होता है कि जिसे वे प्रेम करते है, उससे प्रेम का प्रतिफल नहीं मिलता, किन्तु ये व्यक्ति स्नेहपूर्ण स्वभाव के तथा अत्यंत कृपालु होते है, अपने स्तर से नीचे तथा जाति के बाहर विवाह करने में भी उन्हें कोई आपत्ति नहीं होती .

7. यदि ह्रदय रेखा जंजीराकार हो या सूक्ष्म रेखाओं का एक समूह उसमे आकर मिलता हो तो यह योग इस बात का परिचायक है कि  जातक दिल- फेंक  तबीयत का है और उसके प्रेम में स्थिरता नाममात्र को भी नहीं है, वह उस भँवरे के सामान होता है जो विभिन्न स्वाद प्राप्त करने के लिए फूल- फूल पर मंडराया करता है .

8. यदि शनि क्षेत्र से आरम्भ होने वाली ह्रदय रेखा जंजीराकार हो और चौड़ी भी हो तो जातक विपरीत योनि से नफ़रत करता है, यदि यह रेखा पीले रंग की हो तो जातक के मन में प्रेम की भावना जन्म ही नहीं लेती .


9. यदि यह रेखा इतनी नीचे स्थित हो कि मस्तिष्क रेखा को स्पर्श करती- सी हो तो प्रेम की भावनाओ का मस्तिष्क पर अधिक अधिकार होगा, दूसरे शब्दों में, विचार शक्ति प्रेम कि भावनाओ से दब जायेगी .

10. यदि ह्रदय रेखा हाथ में अपने स्थान से ऊचाई पर स्थित हो और मस्तिष्क रेखा भी अपने स्थान से हटकर इस प्रकार ऊपर की ओर उठ गई हो कि दोनों रेखाओ के बीच फासला कम हो गया हो, तो मस्तिष्क रेखा ह्रदय रेखा पर अधिकार जमा लेती है जिसका फल यह होता है कि प्रेम भावनाएं विचार शक्ति से दब जाती है और जातक अपने प्रेम सम्बन्ध बहुत सोच– विचार कर स्थापित करता है .

11. ह्रदय रेखा पर शनि पर्वत के नीचे द्वीप हो, तो व्यक्ति अपने प्रणय संबंधो के कारण चर्चित होता है, उसका जीवन इस चर्चा से प्रभावित हुए बिना  नहीं रहता, उसे अंदरूनी शारीरिक रोग भी परेशान कर सकते है , यदि ह्रदय रेखा व भाग्य रेखा दोनों पर एक- एक द्वीप हो, तो व्यक्ति किसी भी ऐसी मर्यादा को नहीं मानता जो उसके प्रणय संबंधो के आड़े आये .

12. ह्रदय रेखा पर सूर्य पर्वत के ठीक नीचे द्वीप हो, तो व्यक्ति को गंभीर नेत्र रोग होता है अथवा समय- समय पर नेत्र रोग उसे परेशान करता रहता है .

13. ह्रदय रेखा पर यदि सूर्य पर्वत के नीचे कोई बिंदु हो, तो व्यक्ति कि महत्वकांक्षाओ के लिए यह संकेत हानिकारक सिद्ध होता है, उसे किसी अपने विरह के कारण पीड़ा होती है, यदि ह्रदय रेखा पर बुध पर्वत के नीचे बिंदु हो, तो व्यक्ति मानसिक रोग से ग्रस्त रहता है.


14. ह्रदय रेखा से निकलकर चंद्र पर्वत पर जाने वाली शाखा के अंत में तारा हो, तो व्यक्ति वासना के कारण उन्मादी हो जाता है .

15. ह्रदय रेखा पर वृत्त व्यक्ति को निर्बल ह्रदय बनाये रखता है, ऐसा व्यक्ति किसी की दुःख तकलीफ अथवा परेशानी को देखकर करुणा से भर जाता है .
ह्रदय रेखा ह्रदय रेखा Reviewed by Unknown on August 04, 2012 Rating: 5

मस्तिष्क रेखा

July 11, 2012

यदि किसी जातक के बायें हाथ में   मस्तिष्क रेखा बिल्कुल हल्की या क्षीण हो और दाहिने हाथ में बलवान और स्पष्ट हो तो यह समझना चाहिए कि जातक की  मानसिक प्रवृतियों के विकास में उसके माता-पिता किसी का भी प्रभाव नहीं पड़ रहा है, और स्वंय  ही उसने उनको विकसित किया है, ऐसा योग उन लोगो के हाथो में पाया जाता है जो स्वयं अपने परिश्रम से अपनी उन्नति करते है
  यदि दाहिने हाथ में मस्तिष्क रेखा बायें हाथ के मुकाबले क्षीण या निर्बल हो, तो यह समझना चाहिए कि जातक ने अपने मानसिक विकास के अवसरों से लाभ नहीं उठाया और वह अपने माता-पिता कि मानसिक क्षमता की बराबरी न तो करता है, न कभी कर सकता है, ऐसा व्यक्ति चाहे स्वभाव से हठी क्यों न हो, किन्तु उसमे इच्छा- शक्ति की कमी होती है, वह हठी होगा या नहीं,यह अगूठे के प्रथम पर्व(जिस पर नाखून स्थित होता है ) की बनावट से जाना जा सकता है .अगर नाखून का प्रथम पर्व अपने सामान्य की अपेक्षा बड़े आकार में होगा तो हठ एवं जिद्दीपन की प्रवत्ति जातक में विशेष रूप से पायी जाती है

अब हम यह बतायेगें कि मस्तिष्क रेखा का आरम्भ किस- किस प्रकार से होता है और उसका क्या प्रभाव पड़ता है, उदहारण के लिए मस्तिष्क रेखा तीन प्रकार से आरम्भ हो सकती है -

  1. जीवन रेखा के अंदर से,
  2. जीवन रेखा से जुड़कर,
  3. जीवन रेखा के बाहर से   
प्रथम प्रकार की रेखा सबसे अधिक अनिश्चित है, यह जातक को आवश्यकता से अधिक आवेशात्मक, सावधान और डरपोक बनाती है, ऐसी रेखा की हाथ का स्वामी शीघ्र गड़बड़ा जाता है .ऐसे व्यक्ति सदा अपने आपको मुसीबत में पातें है और साधारण से साधारण बात पर दूसरों से झगड़ते है, यदि मस्तिष्क रेखा चंद्र पर्वत  की ओर मुड जाए तो उसके स्वभाव के विकारों में और अधिक वृद्धि हो जाती है, यदि मस्तिष्क रेखा से बालों के सामान सूक्ष्म रेखाएं निकलती हों तो उसका फल यह होता है कि जातक किसी प्रकार से मस्तिष्क विकार का शिकार हों जाता है, यदि इस प्रकार के योग के साथ ऊपर जाने वाली भाग्य रेखा हथेली के मध्य में कमजोर या हल्की पड़ जाये तो मस्तिष्क विकार का होना निश्चित हों जाता है.किन्तु यदि  इस योग में चंद्र पर्वत अपने सामान्य या सामान्य से थोडा बड़े आकार में होगा तो ये अति विकसित माना जायेगा और मस्तिष्क रेखा के प्रतिकूल प्रभावों को थोडा कम करके देखा जायेगा

              जीवन रेखा से जुड़ कर निकली मस्तिष्क रेखा 

जब किसी हाथ में मस्तिष्क रेखा आरम्भ में जीवन रेखा से जुडी हुई होती है तो जातक अत्यंत भावुक होता है, जब इस प्रकार कि रेखा नीचे कि ओ़र मुड जाये तो भावुकता और भी अधिक बढ़ जाती है, रेखा कि ऐसी बनावट अधिकतर कलाकारों और चित्रकारों के हाथो में पाई जाती है, इसके विपरीत यदि जीवन रेखा से मिली हुई मस्तिष्क रेखा सीधी दूसरे मंगल क्षेत्र कि ओर जाये तो भावुक होते हुए भी अपनी मान्यताओं पर चलने का साहस रखता है 
    

           जीवन रेखा के बाहर से निकली मस्तिष्क रेखा 


    यदि किसी जातक में मस्तिष्क रेखा जीवन रेखा के बाहर से निकली हों किन्तु इस रेखा का फासला जीवन रेखा से अधिक दूर न हों तो यह एक अच्छा योग माना जाता है यदि इस रेखा से एक शाखा बृहस्पति पर्वत से आरम्भ हों तो इस प्रकार कि रेखा का स्वामी महत्वाकांक्षी होता है                         
           

             मस्तिष्क रेखा पर द्वीप का प्रभाव   


  1. मस्तिष्क रेखा पर द्वीपों के प्रभाव का विचार करते समय यह भी देखना आवश्यक है कि द्वीप किस अंगुली के नीचे पड़तें हैं यदि द्वीप रेखा के आरम्भ पर प्रथम उंगली या बृहस्पति क्षेत्र के नीचे हों तो यह प्रगट होता है कि जातक अपने जीवन के आरम्भिक भाग में मानसिक और बौद्धिक निर्बलता का शिकार रहा होगा, इसमें इच्छा शक्ति और महत्वाकांक्षा कि बहुत कमी रही होगी .
  2. यदि द्वीप चिन्ह दूसरी अंगुली या शनि के क्षेत्र के नीचे हों तो जातक  सिर-दर्द, उदासीनता, चिंताकुलता का शिकार हों सकता है, यदि रेखा निर्बल हों और उसमे से सूक्ष्म रेखाए निकलती हों तो यह समझाना चाहिए कि जातक मानसिक विकृति से कभी भी मुक्ति प्राप्त न कर सकेगा. 
  3. यदि द्वीप चिन्ह तीसरी अंगुली या सूर्य क्षेत्र के नीचे हों तो यह समझाना चाहिए कि आँखों में कमजोरी होगी , यदि द्वीप चिन्ह बहुत गहरा हों तो जातक अंधा हों सकता है.
  4. यदि द्वीप चिन्ह चौथी अंगुली या बुध क्षेत्र के नीचे हों तो यह समझाना चाहिए कि वृद्धावस्था में जातक मस्तिष्क की व्याकुलता अथवा चिंता का शिकार होगा 
मस्तिष्क रेखा मस्तिष्क रेखा Reviewed by Unknown on July 11, 2012 Rating: 5

रेखाओं का परिचय

January 16, 2012


लगभग सभी हाथों में तीन रेखाएं पाई जाती हैं और आम तौर पर हस्तरेखाविद् इन पर सबसे ज्यादा जोर देते हैं.
  • बड़ी रेखाओं में हृदय रेखा को हस्तरेखाविद् पहले जांचता है. यह हथेली के ऊपरी हिस्से और उंगलियों के नीचे होती है. कुछ परंपराओं में, यह रेखा छोटी उंगली के नीचे हथेली के किनारे से और अंगूठे की तरु पूरी हथेली तक पढ़ी जाती है.दूसरों में, यह उंगलियों के नीचे शुरू होती है और हथेली के बाहर के किनारे की ओर बढ़ती देखी जाती है. हस्तरेखाविद् इस पंक्ति की व्याख्या दिल के मामलों के संबंध में करते हैं, जिसमें शारीरिक और लाक्षणिक दोनों शामिल होते हैं और विश्वास किया जाता है कि दिल की सेहत के विभिन्न पहलुओं के अलावा यह भावनात्मक स्थिरता, रुमानी दृष्टिकोण, अवसाद व सामाजिक व्यवहार प्रदार्शित करती हैं.
  • हस्तरेखाविद् द्वारा की पहचान की जाने वाली अगली रेखा मस्तिष्क रेखा होती है. यह रेखा तर्जनी उंगली के नीचे से शुरू होकर हथेली होते हुए बाहर के किनारे की ओर बढ़ती है. अक्सर मस्तिष्क रेखा शुरुआत में जीवन रेखा के साथ जुड़ी होती है (नीचे देखें). हस्तरेखाविद् आम तौर पर इस रेखा की व्याख्या व्यक्ति के मन के प्रतिनिधि कारकों के रूप में करते हैं और जिस तरह से यह काम करती है, उनमें सीखने की शैली, संचार शैली, बौद्धिकता और ज्ञान की पिपासा भी शामिल होती है. माना जाता है कि यह सूचना के प्रति रचनात्मक या विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण की प्राथमिकता (यानी, दाहिना  या बांया दिमाग ) का संकेतक होती है.
  • अंत में, हस्तरेखाविद् संभवत: सबसे विवादास्पद रेखा-जीवनरेखा को देखते हैं.
यह रेखा अंगूठे के ऊपर हथेली के किनारे से निकलती है और कलाई की दिशा में मेहराब की शक्ल में बढ़ती है. माना जाता है कि यह रेखा व्यक्ति की ऊर्जा और शक्ति, शारीरिक स्वास्थ्य और आम खुशहाली का प्रतिनिधित्व करती है. ऐसा भी माना जाता है कि जीवन रेखा दुर्घटनाओं, शारीरिक चोट, पुनर्स्थापन सहित जीवन में आने वाले बदलावों को प्रतिबिंबित करती है. आम धारणा के विपरीत, आधुनिक हस्तरेखाविद् आम तौर पर यह विश्वास नहीं करते कि एक व्यक्ति की जीवन रेखा की लंबाई के व्यक्ति की उम्र से जुड़ी हुई है.
अतिरिक्त मुख्य रेखाओं या रूपों में शामिल हैं:
  • एक बंदर रेखा (क्रीज) या दिल और मुख्य रेखा का मिलनस्थल का भावनात्मक और तार्किक प्रकृति दोनों के अध्ययन में अकेले इस रेखा का खास महत्व है. इस अजीब रेखा को सिर और दिल की रेखा का संयोजन माना जाता है और ऐसे हाथ को बाकी हाथों से अलग चिह्नित किया जाता है.
हस्तरेखाशास्त्र के अनुसार, यह रेखा एक व्यक्ति को उद्देश्य की तीव्रता या किसी उद्देश्य के प्रति एकाग्रता प्रदान करती है, जिसका स्वभाव हाथ पर इस रेखा की सही स्थिति और इससे निकलनेवाली किन्हीं शाखाओं से निर्धारित होती है, जो एक सामान्य मामला होता है. उन हाथों में, जिनमें ऐसी रेखा बिना किसी शाखा के एकल चिह्न के रूप में मौजूद होती है, वह अत्यंत गहन प्रकृति की ओर संकेत करती है और व्यक्तियों की विशेष देखभाल की जरूरत होती है. इस रेखा की सामान्य स्थिति सबसे बड़ी उंगली के नीचे शुरू होती है और सामान्य रूप से वहां समाप्त होती है, जहां दिल की रेखा छोटी उंगली के नीचे हाथ के किनारे खत्म होती है, इससे व्यक्ति के औसत हितों का संकेत मिलता है और स्वभाव की गहनता विशुद्ध रूप से यहां से निकलनेवाली किन्हीं शाखाओं की दिशा से निर्धारित होती है. हथेली के ऊपरी आधे हिस्से, जो उंगलियों तुरंत नीचे होता है, व्यक्ति के उच्चतर या बौद्धिक स्वभाव का प्रतिनिधित्व करता है और हथेली के निचला आधा हिस्सा व्यक्ति के स्वभाव के भौतिकवादी पक्ष का प्रतिनिधित्व करता है. अगर इन आधे-आधे हिस्सों में से एक बड़ा होता है, जो मुख्य रेखा की केंद्रीय स्थिति या इस मामले में एकल अनुप्रस्थ हथेली रेखा से निर्धारित होता है, व्यक्ति के स्वभाव के व्यापक विकास के पहलू को प्रदर्शित करता है. हालांकि यह एक आम सिद्धांत है कि अगर यह रेखा अपनी सामान्य स्थिति से नीचे होती है तो इससे गहन बौद्धिक स्वभाव का संकेत मिलता है, पर अगर यह अपनी सामान्य स्थिति से ऊपर होती है, तो घोर भौतिकवादी प्रकृति और हितों को दर्शाता है. इस रेखा से निकली किन्हीं शाखाओं की दिशा का इस रेखा पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, जिससे ऊपर परिभाषित परिणामों से उपयुक्त संशोधन होते हैं और यह हाथ के उभार की प्रकृति पर आधारित होता है. उदाहरण के लिए, यदि इस रेखा से एक शाखा अंगूठे के बिल्कुल विपरीत चंद्रमा के उभार पर हाथ के निचले किनारे की ओर बढ़ती है तो यह संकेत करता है कि व्यक्ति भावुक स्वभाव और काफी हिचकिचानेवाला है.
  • भाग्य रेखा कलाई के पास हथेली के निचले हिस्से से शुरू होती है और हथेली के केन्द्र से होते हुए मध्य उंगली की ओर जाती है. माना जाता है कि यह रेखा स्कूल और कैरियर के चयन, सफलताओं और बाधाओं सहित व्यक्ति के जीवन-पथ से जुड़ी होती है. कभी कभी माना जाता है कि यह रेखा व्यक्ति के नियंत्रण, या एकांतर रूप में व्यक्ति की पसंद और उनके परिणामों से परे परिस्थितियों को प्रतिबिंबित करती है.

मंगल नकारात्मक हस्तकला बृहस्पति, शनि, अपोलो, बुध, मंगल सकारात्मक, मार्स नेगटिव, प्लेन ऑफ़ मार्स, लुना माउंट, नेपच्यून माउंट, वेनस माउंट.[1]
अन्य छोटी रेखाएं:
  • सूर्य रेखा - भाग्य रेखा के समानांतर अंगूठी वाली उंगली के नीचे स्थित यह रेखा यश या घोटाले की ओर इंगित करती है.
  • सूचक और मध्यम उंगलियों के बीच के कटिसूत्र वीनस - छोटी और अंगूठी वाली उंगलियों के बीच से शुरू होने वाली रेखाएं अंगूठी वाली उंगलियों और मध्य उंगली के बीच मेहराबनुमा आकार से गुजरती है और मध्य और अंगूठी वाली उंगलियों के बीच खत्म होती है और माना जाता है कि ये भावुक खोजी बुद्धि और हेराफेरी की क्षमता से संबंधित होती है.
  • संघीय रेखाएं - ये छोटी क्षैतिज रेखाएं दिल की रेखा और छोटी उंगली के अंत के बीच में होती हैं और माना जाता है कि ये कभी-कभी, लेकिन हमेशा नहीं- रोमांटिक करीबी रिश्तों की ओर इशारा करती हैं.
  • बुध रेखा - यह कलाई के पास हथेली के नीचे से शुरू होती है और हथेली होते हुए छोटी उंगली की ओर जाती है माना जाता है कि यह स्वास्थ्य के मुद्दों व्यापार बुद्धि, या संचार में कौशल की ओर इंगित करती हैं.
  • यात्रा रेखा - ये क्षैतिज रेखाएं कलाई और दिल की रेखा के बीच हथेली के किनारे को छूती है, प्रत्येक रेखा व्यक्ति की यात्रा की बारंबारता को दर्शाती है यानी अगर रेखा लंबी होगी तो व्यक्ति की यात्रा भी ज्यादा महत्वपूर्ण होगी.
  • अन्य चिह्न - इनमें नक्षत्र, पार, त्रिकोण, वर्गाकृतियां, त्रिशूल, और प्रत्येक उंगलियों के छल्ले शामिल होते हैं, माना जाता है कि हथेली की स्थितियों के आधार पर उनके प्रभाव और अर्थ अलग-अलग होते हैं और हस्तक्षेप करने वाली रेखाओं से मुक्त होती हैं.
  • "अपोलो रेखा"- अपोलो रेखा का मतलब है एक भाग्यशाली जीवन, यह चंद्रमा के उभार से चलकर अपोलो उंगली के नीचे कलाई तक जाती है.
  • "अशुभ लाइन" - यह जीवन रेखा को पार कर अंग्रेजी के 'एक्स' के रूप में होती है; यह बहुत बुरा संकेत है और हस्तरेखाविद अक्सर इसका उल्लेख नहीं करते, क्योंकि इस अशुभ रेखा के बारे में बताने से व्यक्ति चिंतित हो जाता है. अशुभ लाइन के आम संकेतक में अन्य लाइनों से मिलकर बना 'M' आकार शामिल होता है.
रेखाओं का परिचय रेखाओं का परिचय Reviewed by Unknown on January 16, 2012 Rating: 5

हाँथ के प्रकार

January 16, 2012






हस्तरेखा शास्त्र और उन्हें पढ़ने के प्रकार के आधार पर हस्तरेखाविद् हथेली की आकृति और उंगलियों की लाइनों, त्वचा के रंग और बुनावट, नाखूनों की बनावट, हथेली और उंगलियों की अनुपातिक आकार, पोरों की प्रमुखता और हाथ की कई अन्य खासियतों को देख सकते हैं.
हस्तरेखा शास्त्र की अधिकांश धाराओं में हाथ की आकृतियों को 4 या 10 प्रमुख शास्त्रीय प्रकारों में विभाजित किया जाता है और कभी कभी इसके लिए शास्त्रीय तत्वों या विशेषताओं  का सहारा भी लिया जाता है. हाथ का आकार संकेतित प्रकार के चरित्र के लक्षणों (यानि, एक "अग्नि हाथ" उच्च ऊर्जा, रचनात्मकता, चिड़चिड़ापन, महत्वाकांक्षा, आदि - सभी गुणों को अग्नि के शास्त्रीय तत्व से संबंधित माना जाता है.)

हालांकि भिन्न-भिन्न रूपों के बावजूद सबसे आम वर्गीकरण ही आधुनिक हस्तरेखाविद् प्रयोग करते हैं.
  • 'पृथ्वी' हाथ की पहचान आम तौर पर चौड़ी, वर्गाकार हथेलियों और उंगलियों या मोटी या खुरदरी त्वचा, लाल रंग के तौर पर होती है कलाई से हथेली की उंगलियों के आखिरी हिस्से तक की हथेली की लंबाई आमतौर पर हथेली के सबसे चौड़े हिस्से की चौड़ाई से कम होती है और आम तौर पर उंगलियों की लंबाई के बराबर होती है.
  • 'वायु' हाथ में वर्गाकार या आयताकार हथेली व लंबी उंगलियां होती हैं और साथ ही साथ कभी-कभी उभरे हुए पोर, छोटे अंगूठे और अक्सर त्वचा सूखी होती है. कलाई से हथेली की उंगलियों के नीचे करने के लिए लंबाई आमतौर पर उंगलियों की लंबाई से कम है.
  • 'जल' हाथ देखने में छोटे होते हैं और कभी-कभी अंडाकार हथेली वाले, लंबी व लचीली उंगलियों वाले होते हैं. कलाई से हथेली की उंगलियों के आखिरी हिस्से तक की हथेली की लंबाई आमतौर पर हथेली के सबसे चौड़े हिस्से की चौड़ाई से कम होती है और आम तौर पर उंगलियों की लंबाई के बराबर होती है.
  • 'अग्नि' हाथ में चौकोर या आयताकार हथेली, लाल या गुलाबी त्वचा और उंगलियां छोटी होती हैं. कलाई से हथेली की उंगलियों के आखिरी हिस्से तक की हथेली की लंबाई आमतौर पर उंगलियों की लंबाई से बड़ी होती है.
स्वयं अपनी हथेली में प्रभुत्व वाले तत्व तथा प्रकृति निर्धारित करना सहज है, हाथ के आकार के विश्लेषण में रेखाओं की संख्या और पंक्तियों की गुणवत्ता भी शामिल की जा सकती है. हस्तरेखा शास्त्र की कुछ परंपराओं में, पृथ्वी और जल हाथों में कम और गहरी रेखाएं होती हैं, जबकि वायु और अग्नि हाथ में और अधिक रेखाएं दिख सकती हैं, जिनमें कम स्पष्ट परिभाषा होती है.

हाँथ के प्रकार हाँथ के प्रकार Reviewed by Unknown on January 16, 2012 Rating: 5

बांया और दांया हाँथ का महत्व

January 16, 2012

यद्यपि इस बात पर बहस होती रही है कि कौन सा हाथ पढ़ना बेहतर है, पर दोनों का अपना महत्व है. यह मानने का रिवाज है कि बांया हाथ व्यक्ति की संभावनाओं को प्रदर्शित करता है, और दाहिना सही व्यक्तित्व का प्रदर्शक होता है. कुछ का कहना है कि महत्व इस बात का है कि कौन सा हाथ देखा जाता है. "दाहिने हाथ से भविष्य और बाएं से अतीत देखा जाता है." "बायां हाथ बताता है कि हम क्या-क्या लेकर पैदा हुए हैं और दाहिना दिखाता है कि हमने इसे क्या बनाया है." "दाहिना हाथ पुरुषों का पढ़ा जाता है, जबकि महिलाओं का बायां हाथ पढ़ा जाता है." "बांया हाथ बताता है कि ईश्वर ने आपको क्या दिया है, और दायां बताता है कि आपको इस संबंध में क्या करना है."
लेकिन इन सब कहने की बातें हैं, वृत्ति और अनुभव ही आपको बेहतर ढंग से बतायेगा कि आखिर में कौन सा हाथ पढ़ना ठीक रहेगा.
  • वाम हाथ को दाहिने मस्तिष्क द्वारा नियंत्रित होने के लिए छोड़ दें, (नमूने की पहचान, संबंधों की समझ-बूझ) जिससे व्यक्ति की आंतरिक खासियतों, उसकी प्रकृति, आत्म, स्त्रैण गुण, और समस्याओं के निदान का सोच प्रतिबिंबित होता है. इसे एक व्यक्ति के आध्यात्मिक और व्यक्तिगत विकास का एक हिस्सा माना जा सकता है. यह व्यक्तित्व का "स्त्रैण" हिस्सा (स्त्रैण और ग्रहणशील) है.
  • इसके विपरीत दाहिना हाथ बाईं मस्तिष्क (तर्क, बुद्धि और भाषा) द्वारा नियंत्रित होता है, जो बाहरी व्यक्तित्व, आत्म उद्देश्य, सामाजिक माहौल का प्रभाव, शिक्षा और अनुभव को प्रतिबिंबित करता है. यह रैखिक सोच का प्रतिनिधित्व करता है. यह व्यक्तित्व के "स्त्रैण" पहलू (पुरुष और जावक) से मेल खाता है.
बांया और दांया हाँथ का महत्व बांया और दांया हाँथ का महत्व Reviewed by Unknown on January 16, 2012 Rating: 5
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